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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का फाइल फोटो। Photograph: (सोशल मीडिया)
लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता। हिंदुस्तान की सियासत भी गजब है, खासकर उत्तर प्रदेश की। यहां मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने और उसका वोट हासिल करने के लिए सियासतदां कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। हालांकि जब आज के दिन पूरा देश भारत के पूर्व राष्ट्रपति, 'मिसाइल मैन' के नाम से विख्यात और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, तब कुछ राजनीतिक दल ऐसे भी हैं, जो उन्हें भूल चुके हैं। ये सियासी दल अन्य विषयों पर तो सुबह से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, लेकिन उन्हें फुर्सत नहीं कि कलाम साहब को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।
शर्मनाक स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर रह चुके लोग भी उन्हें याद नहीं कर रहे। दरअसल, इसके पीछे कारण यह है कि कलाम साहब ने कभी खुद को मुसलमान नहीं माना, वह अपने आप को पहले भारतीय मानते थे। अब राजनीतिक दलों को तो वैसे मुसलमान चाहिए, जो उन्हें वोट दिला सकें, ऐसे में कलाम साहब से नजदीकी बनाने से भी क्या फायदा? यूपी में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और अभी से मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में लामबंद करने में सियासी दल जुट गए हैं। मजे की बात इनमें आपस में भी जबरदस्त होड़ है कि मुस्लिम वोट हमें ही मिले। खबर लिखे जाने तक इनमें से किसी ने भी पूर्व राष्ट्रपति को याद नहीं किया था।
सियासत के पैमाने में फिट नहीं बैठते
समाजवादी पार्टी(samajwadi party) के मुखिया व यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव(Akhilesh Yadav ) इस रेस में सबसे आगे दिखते हैं। उन्होंने तो राममंदिर के उद्घाटन का निमंत्रण तक ठुकरा दिया था कि कहीं उनका मुस्लिम वोटबैंक नाराज न हो जाए। हालांकि पिछले दिनों दिल्ली की एक मस्जिद में अपनी पत्नी व सांसदों के साथ जाकर बैठक करने से उन्हें गुरेज नहीं रहा। वह कई मौकों पर साफ कहते रहे हैं कि यूपी की योगी सरकार जानबूझकर मुसलमानों को निशाना बना रही है। हालांकि वह भी पूर्व मुस्लिम राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि अर्पित करने से दूर रहे। यही हाल, उनकी सांसद पत्नी डिंपल यादव का भी रहा। मुसलमानों का वोट तो चाहिए, लेकिन मुस्लिम राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि नहीं, क्योंकि वह सियासत के पैमाने में फिट नहीं बैठते।
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस भी इसी राह पर
कुछ ऐसा ही हाल देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस(Congress) का है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी(rahul gandhi) और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा(priyanka Gandhi) और उनके यूपी के नेताओं का है। इनमें से किसी ने भी कलाम साहब को श्रद्धांजलि देना उचित नहीं समझा। इनमें उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय और यूपी से ही आने वाले पुराने कांग्रेस दिग्गज प्रमोद तिवारी भी शामिल हैं। इनके अलावा सहारनपुर से कांग्रेस सांसद और आजकल यूपी में कांग्रेस के लिए मुस्लिमों को लुभाने में जुटे इमरान मसूद का भी है, उन्होंने भी दूरी बनाए रखी। कारण वही है कि कलाम साहब के नाम पर मुस्लिम वोट नहीं मिलेगा। इसी तरह बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और यूपी की पूर्व सीएम मायावती(Mayawati) भी कलाम साहब को याद करना भूल गईं।
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