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दिल्ली,वाईबीएन डेस्क। जब भारत में 5G सेवा की शुरुआत हुई थी, तब लोगों ने तेज़ इंटरनेट, बेहतर नेटवर्क और स्मार्ट तकनीक की उम्मीद की थी। अब, जब 5G अभी पूरी तरह से हर कोने तक पहुंचा भी नहीं है, दुनिया पहले से ही 6G की ओर कदम बढ़ा रही है। क्या 6G एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगा या यह सिर्फ तकनीकी दौड़ में एक और छलांग होगी?
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ किया है कि सरकार 6G जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी को विकसित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. उनका कहना है कि नई टेक्नोलॉजी के विकास के लिए अब एक साफ और ठोस रोडमैप की जरूरत है, ताकि भारत दुनिया के साथ इस रेस में पीछे न रहे।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दूरसंचार सचिव डॉ. नीरज मित्तल के साथ भारत 6G गठबंधन (B6GA) की प्रगति की समीक्षा की. इस बैठक में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 6G में इनोवेशन को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक और केंद्रित योजना तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि हर वर्किंग ग्रुप की प्रगति की नियमित समीक्षा जरूरी है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर 6G टेक्नोलॉजी में 10% IPR यानी बौद्धिक संपदा अधिकार हासिल कर सके।
6G क्या है?
6G यानी छठी पीढ़ी की मोबाइल नेटवर्क तकनीक। यह तकनीक 5G की तुलना में 100 गुना तेज स्पीड, 1 माइक्रोसेकंड लेटेंसी और स्मार्ट AI-संचालित नेटवर्किंग जैसे फीचर्स लाएगी। इसका मतलब होगा कि इंटरनेट से जुड़ी हर चीज़ लगभग रियल-टाइम में काम करेगी।
कब आ रहा है 6G?
1-भारत सरकार ने 2023 में Bharat 6G Vision Document जारी किया था।
2-भारत में 6G को 2030 तक लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
3-चीन, अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया भी 6G टेस्टिंग में तेजी से काम कर रहे हैं।
6G के संभावित फायदे:
1-तेज़ रफ्तार डेटा ट्रांसफर: 1 टेराबाइट/सेकंड की स्पीड संभव।
2-होलोग्राफिक कम्युनिकेशन: वीडियो कॉल की जगह होलोग्राम में बात करना!
3-स्मार्ट शहर और IoT: ऑटोमैटिक ट्रैफिक कंट्रोल, स्मार्ट एम्बुलेंस, फुल-कनेक्टेड होम्स।
4-AI और मशीन लर्निंग का रीयल-टाइम इंटीग्रेशन।
5-स्पेस-आधारित इंटरनेट: सैटेलाइट्स के जरिए दुनिया के हर कोने में नेटवर्क।
देश को 6G वायरलेस सिस्टम में लीडर बनाने की दिशा में बड़ा कदम
सरकार ने मार्च 2023 में भारत 6G विजन डॉक्युमेंट लॉन्च किया था, जो देश को 6G वायरलेस सिस्टम में लीडर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम था. इसके जरिए एक मजबूत रणनीतिक आधार तैयार किया गया है, ताकि भारत सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल करने वाला देश न रहे, बल्कि तकनीक बनाने वाला देश भी बने।
6G रोलआउट के बाद भारत बन सकता है ग्लोबल इनोवेशन हब
5G के सफल रोलआउट के बाद अब सरकार की नजरें 6G पर हैं. जिस तरह मोबाइल और इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वैसे ही 6G भविष्य में हमारी जरूरतों को नई दिशा देगा. हाई स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट नेटवर्क और नए इनोवेशन के साथ भारत का सपना है कि वो इस बार सिर्फ टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वर्ल्ड लीडर बने और ये सपना अब हकीकत बनने के करीब है।
(अनुष्का चोपड़ा)