Advertisment

रिटायर जज लोकुर का खुलासा, जस्टिस मुरलीधर के एक फैसले के कारण उनके तबादले के लिए कॉ़लेजियम पर दबाव डाला

हाल ही में प्रकाशित पुस्तक पूर्ण न्याय? सुप्रीम कोर्ट के 75 वर्ष में अपने निबंध में जस्टिस लोकुर ने बताया कि कॉलेजियम में उनके कार्यकाल के दौरान, सरकार ने जस्टिस मुरलीधर के तबादले का आग्रह किया था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि उन्होंने इसका विरोध किया था।

author-image
Mukesh Pandit
Justice Muralidhar Lokur
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस मदन बी. लोकुर ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है कि केंद्र सरकार ने जस्टिस एस. मुरलीधर के एक फैसले के कारण उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से ट्रांसफर करने के लिए कॉलेजियम पर बार-बार दबाव डाला था, लेकिन तब तक यह कदम नहीं उठाया गया, जब तक कि ट्रांसफर का विरोध करने वाले प्रमुख जज रिटायर नहीं हो गए।  हाल ही में प्रकाशित पुस्तक पूर्ण न्याय? सुप्रीम कोर्ट के 75 वर्ष में अपने निबंध में जस्टिस लोकुर ने बताया कि कॉलेजियम में उनके कार्यकाल के दौरान, सरकार ने जस्टिस मुरलीधर के तबादले का आग्रह किया था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि उन्होंने इसका विरोध किया था।

दिल्ली हाईकोर्ट से मनमाने ढंग से तबादला किया गया

लोकुर के अनुसार, दिसंबर, 2018 में उनकी रिटायरमेंट के बाद यह मांग फिर से उठी। उस समय जस्टिस एके सीकरी ही इस प्रस्ताव के खिलाफ थे। मार्च, 2019 में जस्टिस सीकरी के रिटायरमेंट के बाद तबादले का प्रस्ताव फिर से उठाया गया। जस्टिस मुरलीधर का फरवरी, 2020 में दिल्ली हाईकोर्ट से “मनमाने ढंग से” तबादला कर दिया गया।

मैंने प्रस्ताव पर अपनी असहमति दी

लॉ न्यूज वेबसाइट के अनुसार, लोकुर ने लिखा, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के कामकाज में पारदर्शिता के बारे में कुछ कहा जाना चाहिए। एक अवसर पर मुझे स्पष्ट रूप से यह आभास हुआ कि कार्यपालिका द्वारा चीफ जस्टिस को एक तबादला करने की सलाह दी गई थी –जस्टिस मुरलीधर का उनके द्वारा दिए गए एक फैसले के लिए दिल्ली हाईकोर्ट से तबादला। मेरे विचार से यह निश्चित रूप से तबादले का आधार नहीं हो सकता। इसलिए मैंने प्रस्ताव पर अपनी असहमति व्यक्त की। चीफ जस्टिस ने मेरे विचार को सहर्ष स्वीकार कर लिया।

जस्टिस मुरलीधर का मनमाने ढंग से तबादला किया गया

ऐसा महसूस होता है कि चीफ जस्टिस  से मेरे रिटायर होने के बाद तबादले का मुद्दा फिर से उठाया गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में नए सदस्य जस्टिस सीकरी का भी यही विचार था। उन्होंने भी प्रस्तावित तबादले का विरोध किया। जस्टिस सीकरी के रिटायरमेंट के बाद जस्टिस मुरलीधर का मनमाने ढंग से दिल्ली हाईकोर्ट से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में तबादला कर दिया गया।”

भड़काऊ भाषण देने वाले नेता को लेकर की थी खिंचाई

Advertisment

जस्टिस मुरलीधर का अंततः फरवरी 2020 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में तबादला कर दिया गया। इस फैसले ने उस समय काफी विवाद खड़ा कर दिया था। यह तबादला आदेश 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोपी नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज न करने के लिए दिल्ली पुलिस की खिंचाई करने के कुछ ही घंटों बाद जारी किया गया था। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस ओक ने कहा कि जस्टिस मुरलीधर को दिल्ली दंगों के मामले में अपने साहसिक आदेशों के परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

Justice Lokur revelation, Justice Muralidhar transfer controversy, Supreme Court collegium news, Judge transfer pressure case, जस्टिस लोकुर बयान, मुरलीधर फैसले पर तबादला, collegium decision controversy, Retired judge news India, SC judge transfer issue, Justice Muralidhar case news

supreme court justice Muralidhar transfer controversy Justice Lokur revelation
Advertisment
Advertisment