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, तो कनाडा में एक पूर्व सैनिक के साथ हुआ व्यवहार इस सामान्य तथ्य को चुनौती देने जैसा था। नोवा स्कोटिया प्रांत के जंगलों में पैदल चलने पर, जेफ एवली नामक पूर्व सैनिक को अधिकारियों ने ₹18 लाख (लगभग $28,872.50) का चौंकाने वाला जुर्माना थमा दिया क्योंकि वहां जंगल में प्रवेश वर्जित था।
इस जुर्माने का कारण था प्रांत सरकार द्वारा लागू विशेष प्रतिबंध जो बढ़ते जंगल आग के खतरों से निपटने के लिए बनाए गए थे। इन प्रतिबंधों में शामिल थे जंगलों में हाइकिंग (पैदल चलना), कैंपिंग, मछली पकड़ना और वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था।जो भी इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, उस पर $25,000 (करीब ₹18 लाख) तक का जुर्माना लगाया जा सकता था।
जेफ एवली ने इस कार्रवाई का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में वह शांति से अधिकारियों को बता रहे हैं कि वे सिर्फ टहलने जा रहे हैं, लेकिन इस पर भी रोक लगने के बावजूद उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद यह भारी जुर्माना थमा दिया गया। एवली ने ट्वीट में इसे “पूरी तरह से पागलपन” करार दिया और इस कार्रवाई की सख्त आलोचना की।
इस घटना ने कनाडा में सुरक्षात्मक उपायों को नागरिक स्वतंत्रता पर भारी पड़ते होने की बहस को गति दी है। कुछ लोगों का मानना है कि जंगल की आग जैसी गंभीर आपदा से बचाव के लिए यह कदम आवश्यक था क्योंकि अधिकांश जंगल आग मानवीय गतिविधियों के कारण होती हैं। वहीं, दूसरी ओर, कुछ लोग इसे सरकारी शक्तियों के प्रयोग के रूप में देख रहे हैं, जो साधारण गतिविधियों को भी अपराध या जोखिम में बदल देती है।
यह मामला हमें याद दिलाता है कि जानवाली सुरक्षा उपायों और नागरिकों की व्यक्तिगत आज़ादी के बीच संवेदनशील संतुलन कितना नाजुक हो सकता है। जहाँ एक ओर सुरक्षा जरूरी है, वहीं दूसरी ओर ये भी महत्वपूर्ण है कि निर्धारित प्रतिबंधतर्कसंगत और सीमा‑बद्ध हों ताकि आम आदमी की सामान्य गतिविधियाँ जैसे कि जंगल में टहलना आपत्तिजनक अपराध न बन जाएँ।