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Viral News: स्‍पेन के इस शहर में मरना है गैरकानूनी! वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

स्पेन के लांजारोन शहर में 1999 से मरना “गैरकानूनी” माना जाता है, क्योंकि वहां कब्रिस्तान में जगह की कमी है। मेयर ने मजाकिया अंदाज में यह नियम बनाया था ताकि समस्या की ओर ध्यान जाए।

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Suraj Kumar
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नई दिल्‍ली, वाईबीएन डेस्‍क। मरना कोई भी नहीं चाहता, लेकिन मौत एक अटल सत्य है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी जगह पर मरना गैरकानूनी हो सकता है? यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन स्पेन के ग्रेनाडा प्रांत के एक छोटे से शहर लांजारोन में ऐसा ही एक अनोखा नियम लागू है। 1999 में इस शहर के तत्कालीन मेयर जोस रुबियो ने एक आदेश जारी किया कि लांजारोन में मरना गैरकानूनी है। इस अजीबोगरीब नियम के पीछे एक बेहद व्यावहारिक वजह है।

मजाक- मजाक में कह दिया सच 

लांजारोन एक छोटा शहर है जिसकी आबादी लगभग 4,000 है। यह शहर अपने खनिज पानी और खूबसूरत झरनों के लिए जाना जाता है, जिससे यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है। लेकिन यहां का कब्रिस्तान बहुत छोटा है और मृतकों को दफनाने के लिए जगह की भारी कमी है। तब के मेयर जोस रुबियो ने कहा था कि नए कब्रिस्तान के लिए जमीन तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। इस वजह से, उन्होंने मजाकिया लहजे में यह आदेश दिया कि मरना गैरकानूनी है ताकि लोग इस समस्या की गंभीरता को समझ सकें। स्थानीय लोग भी इसे हंसी-मजाक में लेकर मानने लगे।

इस शहर में कब्रिस्‍तान की भारी कमी 

हालांकि यह आदेश कानूनी तौर पर व्यावहारिक नहीं है क्योंकि मौत कोई रोक नहीं सकता, लेकिन यह शहर के कब्रिस्तान की जगह की समस्या को उजागर करने का एक तरीका था। 26 साल बाद भी इस शहर में केवल एक ही कब्रिस्तान है और जमीन की कमी अभी भी बनी हुई है। लांजारोन अब युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हो गया है, खासकर उन लोगों में जो स्पेन के बड़े और व्यस्त पर्यटन स्थलों जैसे बार्सिलोना और मालोर्का से दूर एक शांतिपूर्ण जगह की तलाश में हैं।

इसके चलते लिया गया फैसला 

लांजारोन की तरह ही नॉर्वे के लॉन्गइयरबेन शहर में भी ऐसा ही नियम है। वहां की ठंडी जलवायु की वजह से दफनाए गए शव सड़ते नहीं, जिससे पुराने वायरस जीवित रह सकते हैं। 1917 के इन्फ्लूएंजा वायरस के जीवित नमूने भी कब्रिस्तान से मिले हैं। इसलिए बीमारी फैलने के खतरे को देखते हुए वहां कब्रिस्तान को बंद कर दिया गया है।

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इस अनोखी कहानी ने कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया है और इसी पर आधारित दक्षिण भारतीय फिल्म ‘उप्पु कप्पुरंबु’ भी बनी है, जिसमें कीर्ति सुरेश ने गांव के सरपंच की भूमिका निभाई है। यह कहानी हमें बताती है कि कैसे कभी-कभी असामान्य नियम भी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश होती हैं।

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