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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी की मां को लेकर की गई कथित अभद्र टिप्पणी का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान की कड़ी आलोचना हो रही है और अब AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
शालीनता और मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी
शुक्रवार को ओवैसी ने साफ कहा कि राजनीतिक आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसमें शालीनता और मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी दलों को यह संदेश दिया कि वे विरोध करें, निंदा करें, लेकिन भाषा की सीमाएं न लांघें। आवैसी ने कहा कि आप बोलें, विरोध करें, आलोचना करें यह सब लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन अगर आप शालीनता की सीमा पार करते हैं, तो यह गलत है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए उन्होंने आगे कहा कि पीएम की आलोचना हो सकती है, होनी भी चाहिए, लेकिन उसमें निजी आक्षेप नहीं होने चाहिए।
राजनीति में नीचता किसी को आगे नहीं ले जाती
अगर आप बहस को अश्लीलता और निजी हमलों की ओर ले जाते हैं, तो मुद्दों की जगह गाली-गलौज ले लेती है। अगर कोई और ऐसा कर रहा है तो हमें उनकी नकल करने की जरूरत नहीं है। ओवैसी का यह बयान सिर्फ कांग्रेस या महागठबंधन पर नहीं, बल्कि समूचे राजनीतिक तंत्र के लिए एक चेतावनी और नसीहत है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन यह गरिमा के साथ होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि कोई राजनीतिक दल या नेता मर्यादा का उल्लंघन करता है, तो बाकी लोगों को भी वैसा ही करने की जरूरत नहीं है। राजनीति में नीचता की प्रतिस्पर्धा किसी को आगे नहीं ले जाती।
जनीति में भाषा की मर्यादा को लेकर चिंता
गौरतलब है कि हाल ही में बिहार के दरभंगा में महागठबंधन की एक रैली के मंच से पीएम मोदी और उनके परिवार को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इस बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, वहीं अब ओवैसी जैसे विपक्षी नेता भी इससे असहमति जता रहे हैं। यह बताता है कि राजनीति में भाषा की मर्यादा को लेकर चिंता व्यापक है। पिछले कुछ वर्षों में नेताओं के बयानों में निजी हमलों, जातिगत टिप्पणियों और अपशब्दों का चलन बढ़ा है। संसद से लेकर चुनावी मंचों तक, बार-बार यह मुद्दा उठा है कि राजनीतिक विमर्श का स्तर गिरता जा रहा है। Asaduddin Owaisi news | pm modi | rahul gandhi
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