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नई दिल्ली, वाईबीएन नेटवर्क।
PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसमें भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ व्यापार और निवेश संबंधों को और गहरे बनाने के उपायों पर विचार किया। दोनों पक्षों के बीच इस महत्वपूर्ण वार्ता का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझा हितों को प्राथमिकता देना और दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों को और सुदृढ़ करना था।
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi holds a delegation level talks with President of the European Commission, Ursula von der Leyen, in Delhi
— ANI (@ANI) February 28, 2025
(Source - DD News) pic.twitter.com/aHSzQNZXmh
भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जो यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ दो दिवसीय भारत यात्रा पर बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंची थीं। शुुुुुुक्रवार को धानमंत्री मोदी से मुलाकात से पहले एक ‘थिंक टैंक’ को संबोधित किया। इस अवसर पर वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यह दुनिया खतरों से भरी हुई है, लेकिन मेरा विश्वास है कि शक्तियों के बीच महाप्रतिस्पर्धा का यह आधुनिक संस्करण यूरोप और भारत के लिए अपनी साझेदारी को फिर से परिभाषित करने का अवसर है।" उन्होंने आगे कहा कि यूरोपीय संघ और भारत इस चुनौती का एक साथ मिलकर सामना करने के लिए अनोखी स्थिति में हैं, और हमें इस अवसर का पूरी तरह से लाभ उठाना चाहिए।
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भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और निवेश संबंध
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वॉन डेर लेयेन ने यह भी बताया कि वैश्विक अस्थिरता और महाशक्ति प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत और यूरोपीय संघ दोनों अपने साझा मूल्यों और लक्ष्यों के आधार पर मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार भारत और यूरोपीय संघ के लिए यह समय अपने रिश्तों को और मजबूत करने का है, क्योंकि दोनों ही राष्ट्र लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्रता, और मानवाधिकार के पक्षधर हैं। बैठक में व्यापार और निवेश के मुद्दे पर भी गहरी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने एक महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते को लेकर जारी वार्ता की समीक्षा की और यह सुनिश्चित करने पर विचार किया कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी में महत्वपूर्ण वृद्धि हो। प्रधानमंत्री मोदी ने इस संदर्भ में कहा कि हम भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और निवेश को और बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और हमें विश्वास है कि यह साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी होगी।
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भारत का यूरोपीय संघ से बढ़ता व्यापार और निवेश
वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत का यूरोपीय संघ के साथ द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें 76 अरब अमेरिकी डॉलर का भारतीय निर्यात और 59 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात शामिल है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यूरोपीय संघ अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। इसके अलावा, भारत और यूरोपीय संघ के बीच सेवाओं के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 2003 में द्विपक्षीय व्यापार 53 अरब अमेरिकी डॉलर था, जिसमें भारतीय निर्यात 30 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 23 अरब अमेरिकी डॉलर का था। यह सेवाओं के क्षेत्र में अब तक का सबसे अधिक व्यापार है।
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भारत में यूरोपीय संघ का निवेश
भारत में यूरोपीय संघ का निवेश भी महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है, जो 117 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। यूरोपीय संघ से लगभग 6,000 यूरोपीय कंपनियां भारत में कार्यरत हैं, जो भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान कर रही हैं। इसके अलावा, यूरोपीय संघ में भारत का निवेश भी करीब 40 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो यूरोपीय देशों में भारतीय कंपनियों के विस्तार और विकास को दर्शाता है।
वैश्विक मुद्दों पर सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के बीच चर्चा में रूस-यूक्रेन युद्ध, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने इन वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने और संयुक्त रूप से इन चुनौतियों का सामना करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह वार्ता भारत और यूरोपीय संघ के बीच गहरे और विस्तृत रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक अहम कदम है। मोदी और वॉन डेर लेयेन की वार्ता के बाद एक संयुक्त बयान जारी किए जाने की संभावना है, जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक मुद्दों पर साझेदारी बढ़ाने के लिए किए गए उपायों की जानकारी दी जाएगी। इस बयान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों का उल्लेख किया जा सकता है।
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