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स्वच्छ हवा पर केवल दिल्ली-एनसीआर का ही अधिकार नहीं, प्रदूषण नीति पूरे देश में लागू हो :​ Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की नीतियां केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरे देश में लागू होनी चाहिए।

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Ranjana Sharma
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्‍कदेश में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्त टिप्पणी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बी.आर. गवई ने कहा कि स्वच्छ हवा केवल दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों का अधिकार नहीं, बल्कि यह पूरे देश के हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की नीतियों को पैन-इंडिया स्तर पर लागू किया जाना चाहिए, न कि केवल राजधानी के लिए बनाए रखना चाहिए।

पटाखों पर प्रतिबंध देश में लगना चाहिए

बेंच की सुनवाई के दौरान, जिसमें जस्टिस के. विनोद चंद्रन भी शामिल थे, सीजेआई बी.आर. गवई ने पटाखा निर्माताओं की उस याचिका पर विचार किया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर पूरे साल के लिए लगे प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी। बेंच ने कहा कि हम दिल्ली के लिए अलग नीति नहीं बना सकते, सिर्फ इसलिए क्योंकि वहां देश का संभ्रांत वर्ग रहता है। सीजेआई ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया मैं पिछले साल सर्दियों में अमृतसर गया था। वहां प्रदूषण की स्थिति दिल्ली से भी बदतर थी। अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो यह पूरे देश में लगना चाहिए।

नीतियां सिर्फ अमीरों के लिए बनाई जा रही हैं ?

कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब एमिकस क्यूरिए एडवोकेट अपराजिता सिंह ने दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की भयावह स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली एक लैंडलॉक्ड शहर है, जहां हवा में प्रदूषक फंस जाते हैं, जिससे स्थिति चोकिंग लेवल तक पहुंच जाती है। लेकिन, सिंह ने स्वीकार किया कि एलीट वर्ग प्रदूषण के चरम दिनों में शहर छोड़ देता है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या नीतियां सिर्फ अमीरों के लिए बनाई जा रही हैं? बेंच ने स्पष्ट किया कि सभी नागरिकों को स्वच्छ हवा का समान अधिकार है, चाहे वे किसी भी शहर में रहें।

दो हफ्तों में जवाब मांगा

इसी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर एक्शन लिया, जिसमें पटाखों पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) को नोटिस जारी किया और दो हफ्तों में जवाब मांगा। यह नोटिस दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिकाओं के संदर्भ में भी जारी किया गया।
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