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पूछताछ में छांगुर ने लिया नीतू का भी नाम।
लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता । अवैध धर्मांतरण प्रकरण में मुख्य आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर ने ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की पूछताछ में विदेशी फंडिंग से सीधा पल्ला झाड़ लिया है। छांगुर ने दावा किया कि उसके खाते में जो पैसे आए, वे दुबई में बसे नवीन रोहरा द्वारा भेजे गए थे, जिनका उद्देश्य केवल संपत्ति खरीदना था। छांगुर की ओर से दिए गए बयान में एक बार फिर अवैध धर्मांतरण में शामिल होने से साफ इनकार किया गया है।
दुबई से आए पैसे, नीतू और नवीन के जरिए संपत्ति में निवेश
छांगुर ने स्वीकार किया कि नवीन द्वारा दुबई की कंपनियों से भेजे गए पैसे में से बड़ी राशि उसकी और नीतू की संयुक्त संपत्तियों में लगी। इन पैसों से पुणे समेत कई स्थानों पर जमीन और फ्लैट खरीदे गए। हालांकि जब ईडी ने नवीन की आमदनी और करोड़ों की फंडिंग के स्रोत को लेकर सवाल किया, तो छांगुर के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।
संपत्ति रजिस्ट्री में राजेश उपाध्याय का नाम आया सामने
पूछताछ के दौरान छांगुर ने यह भी बताया कि उसकी मुलाकात तहसील परिसर में कार्यरत सीजीएम कोर्ट के बाबू राजेश उपाध्याय से हुई थी, जो संपत्तियों की रजिस्ट्री में मदद करता था। उसने यह भी कहा कि पुणे की एक संपत्ति को वह नवीन के साथ मिलकर खरीदने वाला था।
ईडी को अब तक की जांच में क्या मिला
ईडी की जांच में अब तक सामने आया है कि नवीन और नीतू के बैंक खातों में करीब 63 करोड़ रुपये की धनराशि आई। इनमें से 2.55 करोड़ रुपये की रकम सीधे यूएई से ट्रांसफर हुई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इनमें से लगभग 4 करोड़ रुपये की रकम का उपयोग संपत्तियों की खरीद में हुआ। ये संपत्तियां छांगुर, नवीन और नीतू के नाम पर अलग-अलग लोगों के माध्यम से ली गईं। हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस पूरी धनराशि में से अवैध धर्मांतरण के लिए कितनी रकम का प्रयोग किया गया। ईडी को इस बात की आशंका है कि छांगुर के पास यूपीआई ट्रांजैक्शनों के माध्यम से भी मोटी रकम आई है, जिसकी पड़ताल की जा रही है।
मुंबई में एटीएस की सक्रियता, सहयोगियों की तलाश में जुटी टीम
उधर, एटीएस (एंटी टेररिज्म स्क्वॉड) की एक विशेष टीम मंगलवार को मुंबई पहुंची, जहां वह छांगुर से जुड़े चार संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश में है। सूत्रों के मुताबिक ये चारों युवक मुंबई में छांगुर के संपर्क में थे और कथित तौर पर अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों में उसकी मदद करते थे।एटीएस को यह जानकारी रिमांड के दौरान छांगुर से ही मिली थी।
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