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बिजली महंगी कराने में जुटा पावर कारपोरेशन : उपभोक्ता परिषद की अपील-कंपनियों पर बकाया के आधार पर दरें घटाए आयोग

विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि पावर कारपोरेशन औद्यो​गिक समूहों को फायदा पहुंचाने के लिए चोरी-छिपे बिजली दरों में इजाफा कराना चाहता है।

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Deepak Yadav
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बिजली कंपनियों पर बकाया के आधार बिजली दरों में कमी करे आयोग Photograph: (Google)

लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता। उत्तर प्रदेश में बिजली की दरें और पावर ट्रांसमिशन टैरिफ का ऐलान जल्द होने की संभावना है। इसी बीच विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से बिजली दरों में कमी करने की मांग की है। परिषद ने दावा किया कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33,122 करोड़ रुपये पहले से ही बकाया है। इस वित्तीय वर्ष में भी बकाया निकलना तय है। ऐसे में कानून के मुताबिक, दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जानी चाहिए।

500 करोड़ तक काम ट्रांसमिशन कारपोरेशन को ही दिए जाएं

पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ने अपने 2 प्रतिशत रिटर्न ऑफ इक्विटी यानी कि फायदे को बढ़ाकर 14.5 प्रतिशत मांग की है। इससे कारपोरेशन  सीधे 1824 करोड़ का फायदा होगा। इसलिए टैरिफ बेस कॉम्पिटेटिव बिल्डिंग (टीबीसीबी) के 500 करोड़ तक के काम पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन को ही दिए जाएं। 

औद्योगिक समूहों को फायदा पहुंचाने की कोशिश

उपभोक्ता परिषद ने तर्क दिया कि पावर ट्रांसमिशन जब इस तरह के काम खुद करता है तो लागत में 15 से 25 तक कमी आती है। परिषद ने आरोप लगाया कि पावर कारपोरेशन औद्यो​गिक समूहों को फायदा पहुंचाने के लिए चोरी-छिपे बिजली दरों में इजाफा कराना चाहता है। देश में ऐसा कोई कानून नहीं, जो उपभोक्ताओं के बिजली कंपनियों पर पहले से बकाया होने पर दरों में बढ़ोतरी की अनुमति देता है।

उपभोक्ता हित में आयोग को लेना चाहिए फैसला 

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 में मानकों में बदलाव किए गए हैं। इससे बिजली कंपनियों को सीधे 3,000 से 4,000 करोड़ का फायदा होने का अनुमान है। हालांकि वर्ष 2024-25 ऑडिटेड आंकड़ों के मूल्यांकन से उपभोक्ताओं का 3000 करोड़ रुपये सरप्लस सामने आएगा। ऐसे में विद्युत नियामक आयोग को वर्तमान सरप्लस को आधार मानकर बिजली दरों में कमी का फैसला लेना चाहिए।

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