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अवैध दवा स्टोरेज का मामला: भाजपा के पूर्व सांसद व कोच गौतम गंभीर के खिलाफ हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित

ड्रग कंट्रोलर ने गौतम गंभीर के अलावा गौतम गंभीर फाउंडेशन, इसकी सीईओ अपराजिता सिंह, सीमा गंभीर और नताशा गंभीर के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स कानून की धारा 18(सी) के तहत मामला दर्ज कराया था।

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Mukesh Pandit
Gambhir Drug case
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दवाइयों और ऑक्सीजन के अवैध भंडारण और वितरण के मामले में भाजपा के पूर्व सांसद और भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर समेत दूसरे आरोपियों के खिलाफ ड्रग कंट्रोलर की ओर से दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग करने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

रोहिणी कोर्ट में चल रही है मामले की सुनवाई

गौतम गंभीर की ओर से वकील अनंत देहाद्राय ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की। दरअसल, गंभीर के खिलाफ दर्ज मामले में रोहिणी कोर्ट में सुनवाई चल रही है। ड्रग कंट्रोलर ने गौतम गंभीर के अलावा गौतम गंभीर फाउंडेशन, इसकी सीईओ अपराजिता सिंह, सीमा गंभीर और नताशा गंभीर के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स कानून की धारा 18(सी) के तहत मामला दर्ज कराया है। 

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के ड्रग कंट्रोलर ने 8 जुलाई 2021 को गौतम गंभीर फाउंडेशन और इसके ट्रस्टी और सीईओ के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों के तहत मामला शुरू किया था. इसी तरह के आरोपों के तहत आप विधायकों प्रवीण कुमार और इमरान हुसैन के खिलाफ भी मामला शुरू किया गया.

क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2021 में कोविड की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने गंभीर, उनकी फाउंडेशन और परिवार के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप है कि फाउंडेशन ने बिना वैध लाइसेंस के कोविड दवाओं का स्टॉक किया और बांटा। वहीं, इमरान हुसैन पर आरोप है कि उन्होंने हरियाणा ड्रग कंट्रोल विभाग से अनधिकृत रूप से मेडिकल ऑक्सीजन हासिल किया। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 18(सी) और 27(बी)(ii) के तहत बिना लाइसेंस दवा रखना और बांटना अपराध है। इसमें तीन से पांच साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

पहले मिली थी अंतरिम राहत

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वर्ष 20 सितंबर 2021 को हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई थी और दिल्ली ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी से जवाब मांगा था, लेकिन 9 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने यह स्टे हटा लिया क्योंकि उस दिन गंभीर की ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ. गंभीर के वकील का कहना है कि स्टे बिना उनकी दलील सुने हटा दिया गया. उन्होंने मांग की कि या तो स्टे बहाल किया जाए या फिर 8 सितंबर से पहले इस पर सुनवाई कर दी जाए। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस मामले पर विस्तार से सुनवाई 29 अगस्त को होगी। तब तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक बहाल करने से अदालत ने साफ मना कर दिया था।  BJP ex MP news | Delhi high court | delhi highcourt | Delhi High Court News

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