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निजी कंपनियों की सीएजी ऑडिट नहीं Photograph: (google)
लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा कि बिजली कंपनियों का निजीकरण करने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के 42 जिलों की बिजली आपूर्ति निजी हाथों में देने से उन पर सीएजी का नियंत्रण नहीं रहेगा। अगर वह 100 रुपये का खर्च दिखाकर एक हजार वसूले तो चोरी पकड़ा मुश्किल होगा। नोएडा पावर कंपनी और टोरेंट में यही चल रहा है।
यूपी में निजीकरण के दोनों प्रयोग असफल
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश में निजीकरण के दोनों प्रयोग असफल हुए हैं। 1993 में नोएडा पावर कंपनी प्राइवेट सेक्टर में दी गई। आज भी प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में उसके लाइसेंस को खत्म करने की याचिका दाखिल कर लड़ाई लड़ रही है। साल 2010 आगरा में वितरण फ्रेंचाइजी टोरेंट पावर को दी गई है। आज भी वह करोड़ों रुपये पावर कारपोरेशन का वसूलकर वापस नहीं कर रही है। अभी तक इन दोनों निजी कंपनियों की समीक्षा नहीं की गई। इनके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में बिजली से जुड़ी समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है।
सीएजी नहीं कर सकता निजी घरानों की जांच
वर्मा ने कहा कि निजी घरानों की वित्तीय जांच सीएजी (सरकारी ऑडिटर) नहीं कर सकता। वह मनमानी रिपोर्ट निजी ऑडिटर से बनवाकर नौ का सौ कर सकते हैं। परिषद की मांग पर तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने दोनों निजी घरानों की 2020 में जांच के आदेश दिए। टोरेंट पावर जांच में दोषी पाया गया, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि निजी घरानों का मतलब है उन्हीं का खाता उन्हीं की बही जो वो बताएं वही सही।
निजीकरण का फैसला लिया जाए वापस
अवधेश वर्मा ने कहा प्रदेश की बिजली कंपनियों की हर हफ्ते समीक्षा होती है। महीने में एक दो बार सरकार के स्तर और एक दो महीने में मुख्यमंत्री भी समीक्षा करते हैं। इसके बावजूद भी उपभोक्ताओं का उत्पीड़न होता है। प्रदेश की बिजली व्यवस्था तरह निजी घरानों के हाथ दे दी जाएगी तो वह अपने हिसाब से मनमानी कार्रवाई करेंगे। ऐसे में प्रदेश सरकार को निजीकरण का फैसला तत्काल वापस लेना चाहिए।
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