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शौक नहीं मजबूरी, पुरानी पेंशन जरूरी? शिक्षकों और कर्मचारियों ने निकाला रोष मार्च

शिक्षक और कर्मचारी संगठनों ने नारे लगाते हुए शहीद स्मारक तक पैदल विरोध मार्च निकाला। मार्च के बाद जिलाधिकारी के जरिए मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की।

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Deepak Yadav
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पुरानी पेशन के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों ने निकाला रोष मार्च Photograph: (YBN)

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लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता। शौक नहीं मजबूरी है, पुरानी पेंशन जरूरी है। पेंशन हक है लेकर रहेंगे। कुछ इन्हीं नारों के साथ तख्ती लिए कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए रोष मार्च निकाला। शुक्रवार को नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम और अटेवा के आह्वान पर लखनऊ समेत प्रदेश मुख्यालय पर निजीकरण समाप्त करने, स्कूलों के मर्जर हटाने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग की गई। 

शहीद स्मारक तक विरोध मार्च

इस दौरान हजरतगंज स्थित स्व. बीएन सिंह की प्रतिमा पर एकजुट हुए शिक्षक और कर्मचारी संगठनों ने नारे लगाते हुए शहीद स्मारक तक पैदल विरोध मार्च निकाला। मार्च के बाद जिलाधिकारी के जरिए मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की। रोष मार्च का नेतृत्व कर रहे अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने कहा कि सरकार लगातार सरकारी संस्थाओं का निजीकरण कर बेरोजगारी को बढ़ावा दे रही है। सरकार निजीकरण समाप्त करे और शिक्षक व कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल करे। 

सरकार मर्जर खत्म करे

प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने कहा कि सरकार मर्जर को खत्म करे। मर्जर से गांव के गरीब बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ के प्रधान महासचिव अशोक कुमार ने कहा कि निजीकरण बढ़ने के कारण अब जनता को इलाज कराने में काफी धन खर्च करना पड़ रहा है। 

पुरानी पेंशन बहाल करे सरकार

प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ.राजेश कुमार ने कहा कि सरकार यूपीएस-एनपीएस समाप्त कर पुरानी पेंशन बहाल करे। रेलवे में आउटसोर्सिंग और निजीकरण का बोझ यात्रियों पर रेलवे के अमरीक सिंह ने कहा कि सरकार लगातार रेलवे में आउटसोर्सिंग और निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे आम यात्रियों पर भार बढ़ रहा है। 

निजीकरण  उचित नहीं

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पीडब्ल्यूडी के भारत सिंह व महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनोज पांडेय ने कहा कि निजीकरण से सरकारी पदों को समाप्त किया जा रहा है जो उचित नहीं है। पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के महामंत्री रामेंद्र श्रीवास्तव व पीजीआई की लता सचान ने कहा कि अटेवा ही एकमात्र संगठन है जो निजीकरण समाप्ति की लड़ाई मजबूती से लड़ रही है।

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