वैज्ञानिकों की कमी के बावजूद देश-विदेश में चमकी शाहजहांपुर के यूपी गन्ना शोध परिषद की परफॉर्मेंस, नई प्रजातियां बनीं किसानों की पहली पसंद
113 वर्ष पुरानी यूपी गन्ना शोध परिषद वैज्ञानिकों की दो-तिहाई कमी और संसाधनों के संकट के बावजूद बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। लाल सड़न रोग रोधी नई प्रजाति कोशा-18231 की प्रदेश में रिकॉर्ड मांग है। कम लागत में अधिक उत्पादन व अधिक चीनीपरता से मांग बढी है।
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद स्थित शोध संस्थान भवन Photograph: (वाईबीएन नेटवर्क)
कईप्रजातियोंपर मिलेसफलपरिणामोंकेकारणनेपाल, हरियाणा, बिहार, उत्तराखंडकेगन्नाविभाग वचीनीमिलकेअधिकारीऔरवैज्ञानिकभीप्रशिक्षणकेलिएयूपीगन्नाशोधपरिषदआरहे हैं।वैज्ञानिकोंकादावाहैकियदिसंसाधनमिलेऔरकर्मचारियोंकीकमीदूर हो जाए तोब्रिटिशकालीनगन्नाशोधपरिषददेशकीमिठासबढानेकेसाथहीकिसानोंकीखुशवाली व चीनीमिलो कीप्रगतिमेंअविस्मरणीयकार्यकेसाथहाथबंटासकेगा।
प्रसारअधिकारी डॉ. संजीव पाठककहतेहैं कि गन्नाशोधपरिषदकेवैज्ञानिक शासन की मंशानुरूप बेहतर कार्य रहेहैं। नई गन्ना किस्मों को बेहतर प्रदर्शन होने से लगातार मांग बढ रही है।
Advertisment
मिठास मेला में गन्ना विकास यात्रा की जानकारी देते वैज्ञानिक अधिकारी डा अरिवंद कुमार Photograph: (वाईबीएन नेटवर्क)
पूर्व वैज्ञानिक अधिकारी डा सुरेश चंद्र मिश्रा का कहना है कि यदि पर्याप्तस्टाफऔरसंसाधन मिलेंतोयूपीसीएसआरदेशके प्रतिष्ठित संस्थान आइसीएआर के समकक्षसबसेबड़ागन्नाअनुसंधानकेंद्रबनसकताहै।उन्होंने कहा कि गन्ना शोध परिषदप्रत्येकक्षेत्र में आगे बढ रहा है, सीओ 0238 गन्नाकिस्मकेविकल्पके रूप मेंकोशा 13235 गन्नाकिस्मसामने है, जिससे किसानरिकार्ड 2600 क्विंटलप्रतिहेक्टेयरगन्ना उपज ले रहेहैं। जरूरत विज्ञानियों को 58 प्रतिशत डीए व पूर्ण पेंशन की है। इससे वैज्ञानिकों में उत्कृष्ट कार्य की प्रवृत्ति व होड बढेगी ।
मिठास मेला में गन्ना की आधुनिक तकनीक की जानकारी देते वैज्ञानिक अधिकारी डा जीएन गुप्ता Photograph: (वाईबीएन)मिठास ममेला में गन्ना विकास की जानकारी देते वैज्ञानिक Photograph: (वाईबीएन)