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सांसद अरुण सागर Photograph: (वाईबीएन नेटवर्क)
शाहजहांपुर वाईबीएन संवाददाता ।किसानों की आर्थिक समस्याओं और फसल मूल्य गिरावट के मुद्दे को लेकर सांसद अरुण सागर ने संसद में नियम 377 के तहत जोरदार ढंग से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिले में आलू, गेहूं, धान और गन्ने जैसी प्रमुख फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं, लेकिन खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की कमी के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है। इससे उनकी आय में भारी गिरावट आती है और बड़ी मात्रा में उपज बर्बाद हो जाती है।सांसद ने प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत शाहजहांपुर में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए त्वरित वित्तीय और तकनीकी सहायता की मांग की। उन्होंने कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग इकाइयों और स्थानीय विपणन केंद्रों की स्थापना का भी आग्रह किया। उनका मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर आलू से चिप्स और स्टार्च, गेहूं से आटा और बिस्कुट, गन्ने से चीनी, गुड़ और इथेनॉल आधारित उत्पाद तैयार किए जाएं, तो इससे न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।
अरुण सागर ने युवाओं और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने की मांग की ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने एक संयुक्त समिति के गठन का भी सुझाव दिया, जो इन योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रगति की निगरानी कर सके।
सांसद ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने और उन्हें सम्मान देने के लिए अनेक योजनाएं चलाई हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और किसान मान-धन योजना जैसे कार्यक्रमों से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
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