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डा दीप्ति सिंह के पशु प्रेम की झलक Photograph: (स्वयं)
शाहजहांपुर, वाईबीएन संवाददाताः समाज में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ करुणा और संवेदना को भी उतनी ही निष्ठा से निभाते हैं। शाहजहांपुर की रक्षा विभाग के OCF चिकित्सालय की प्रधान चिकित्साधिकारी डॉ. दीप्ति सिंह ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं। वे न सिर्फ मानव-सेवा में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं, बल्कि घायल, बेसहारा और असहाय जानवरों की ‘मां’ बनकर उनकी रक्षा भी करती हैं। सड़क पर दिखने वाले हर घायल जीव को वे घर ले जाती हैं, उपचार करती हैं और वापस स्वस्थ जीवन देती हैं। परिवार से मिले संस्कार, पशु-प्रेम, और समाज के प्रति समर्पण ने उनके जीवन को एक ऐसे मिशन में बदल दिया है, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है।
संवेदना व सेवा ने बना दिया खास, चहुंओर हो रही चर्चा, आखिर क्या हैं डॉ. दीप्ति सिंह... प्रेरक कहानी
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ओसीएफ शाहजहांपुर की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीप्ति सिंह पेशे से डॉक्टर हैं। उनके पति डा अजय कुमार यादव देवरिया मेडिकल कालेज में एसोसिएट प्रोफेसर व जाने माने अस्थिरोग विशेषज्ञ व सर्जन हैं। चिकित्सक दंपति हृदय से पशुप्रेमी हैं सड़क पर कोई घायल कुत्ता, बिल्ली, बंदर, गाय या पक्षी दिख जाए- तो वे उसे अनदेखा नहीं करते। उन्हें घर लाकर स्वयं दवा, पट्टी और देखभाल कर स्वस्थ करती हैं। चित्र में जो आप देख रहे, वह एक स्ट्रीट डॉग्स है, जो किसी वाहन से घायल हो गया। उसे घर लोकर दंपति ने उपचार किया, और वह अब पूरी तरह स्वस्थ है।
देहरादून के बाद शाहजहांपुर में अहम पहचान, ... पशु प्रेमी मेनका गांधी ने दीपक गुप्ता से परिचय करा दिया नया मुकाम
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डा दीप्ति सिंह देहरादून में रक्षा विभाग के चिकित्सालय में चिकित्साधिकारी थी। वहां भी वह पशु सेवा के लिए चर्चित रहीं। इसी दौरान उनका पशु प्रेमी राजनेता मेनका गांधी से परिचय हुआ। मेनका गांधी उनका काम देख बेहद प्रभावित हुई। शाहजहांपुर में नई पोस्टिंग पर आने के बाद पशु प्रेमी मेनका गांधी ने उनका परिचय स्थानीय पशु-सेवक दीपक गुप्ता और उनकी टीम से कराया। यहां एक नंदी यानी बैल के मुंह में फंसे रसगुल्ले के कैन को निकालने के कठिन रेस्क्यू में जब उन्होंने टीम के साथ कदम बढ़ाया, उसी दिन से वे पशु-सेवा के मिशन में सक्रिय रूप से जुड़ गईं। आज दीपक गुप्ता और उनकी टीम के साथ मिलकर वे शहरभर में घायल जानवरों का निःशुल्क उपचार और रेस्क्यू करती हैं।
जिला जज रहे पिता और मां से मिला संवेदना व करुणा का संस्कार, जो बन मानव और पशु सेवा का आधार
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डॉ. दीप्ति सिंह की जन्मभूमि कानपुर (रावतपुर) है। उनके पिता शिव सिंह जिला जज रहे, जिनके आदर्श, न्यायप्रियता और संवेदनशीलता ने उन्हें जीवन में करुणा का महत्व सिखाया। पारिवारिक संस्कारों से ही उनमें पशु-प्रेम और सेवा-भाव पनपा। साधन संपन्न होने के बावजूद डॉ. दीप्ति सिंह ने जीवन मूल्यों को अपनाए रखा, यही कारण है कि कर्तव्यपरायणता से विभाग में सम्मान के साथ ही लोग दिल से उनका आदर करते हैं।
भाई शशांक सिंह भी निभा रहे परिवार के पशु प्रेम, जीव सेवा की परंपरा
डा दीप्ति सिंह के भाई शशांक सिंह, प्रवर्तन अधिकारी (EPFO), भी बचपन से ही पशु-प्रेमी रहे। दोनों भाई-बहन को मां ने बचपन से ही जीव-जंतुओं से प्रेम करना सिखाया। शशांक सिंह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का कार्य करते हैं। डा दीप्ति सिंह बताती है जब कोई अडचन आती है तो भाई उनकी मदद करते हैं।
पति प्रतिष्ठित सर्जन, बेटा राष्ट्रीय शतरंज प्रतिभा... परिवार बना शक्ति का आधार
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कहते हैं कि जीवों पर दया से प्रभु कृपा बरसती है। डॉ.दीप्ति सिंह इसकी मिसाल है। उनके पति डॉ. अजय कुमार यादव, राजकीय मेडिकल कॉलेज देवरिया में ऑर्थोपेडिक सर्जन और एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उनकी प्रतिबद्धता और सहयोग डॉ. दीप्ति के सेवा-भाव को नई ऊर्जा देता है। सिर्फ यही नहीं... उनका 5 वर्ष से भी कम उम्र का बेटा इशांक यादव, राष्ट्रीय स्तर पर भारत के सबसे कम उम्र के शतरंज खिलाड़ियों में शामिल है। उसे ऑल इंडिया रैंकिंग में दूसरा स्थान मिला है। अक्टूबर माह में बेटे के पांचवे जन्मदिन पर देवरिया में आयोजित भव्य समारोह में वहां के सांसद शशांक मणि समेत जन प्रतिनिधियों व क्षेत्र के प्रबुद्धजन ने देश की प्रतिभा इशांक यादव को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया।
कहा जा सकता है कि जिस घर में करुणा और सेवा बसती है, वहीं बुद्धि, प्रतिभा और उजाला भी जन्म लेते हैं।
डॉ. दीप्ति सिंह का समाज के नाम संदेश... घायल जानवर दिखें तो सूचना दें
डॉ. दीप्ति सिंह ने शाहजहांपुर के ओसीएफ अस्पताल में चिकित्सा सेवा के साथ ही अपने कार्य, व्यवहार व आचरण से अनूठी पहचान बनाई है। शेष समय में वह परिवार की देखभाल के साथ पशु प्रेमी दीपक गुप्ता के साथ मिलकर जीव दया के सरोकार को भी जी रही हैं। उनका एक ही कहना है कि सड़क पर कोई घायल या बीमार जानवर दिखे तो बस उसकी लोकेशन, फोटो या वीडियो भेज दें।
टीम बिना किसी शुल्क के मदद पहुंचाती है।
कर्मसाधना से डॉ. दीप्ति सिंह ने गढी चिकित्सक की नई परिभाषा
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डॉ. दीप्ति सिंह ने यह साबित कर दिया कि चिकित्सक ... शरीर ही नहीं, मन, समाज को भी उपचारित कर सकते उनकी करुणा, उनकी सेवा और उनका समर्पण आज के समाज के लिए एक उजली मिसाल है। सच्ची दया वही है जो बिना स्वार्थ, बिना सीमा और बिना शोर के की जाए।
शाहजहांपुर जनपद का सौभाग्य है कि संवेदना, सेवा, समर्पण, करुणा, ममता की प्रतिमूर्ति डा दीप्ति सिंह को यहां सेवा का अवसर मिला है। डा दीप्ति सिंह की कर्म साधना के प्रतिफल से क्रांतिकारियों की धरा भी गौरवान्वित हो रही है। उनके बेटे इशांक ने राष्ट्रीय क्षितिज पर पैतृक भूमि देवरिया के साथ शाहजहांपुर का भी नाम रोशन कर दिया।
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