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हत्या के प्रयास मामले में एक आरोपी को उम्रकैद, चार को 5-5 साल की सजा

लखनऊ के नगराम थाना क्षेत्र में वर्ष 2009 के हत्या प्रयास मामले में कोर्ट ने आरोपी मंशाराम को आजीवन कारावास व 50,000 जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि चार अन्य अभियुक्तों को 5-5 साल की कैद व 5,000 जुर्माना किया गया।

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Shishir Patel
Court Verdict UP

फाइल फोटो।

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लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता।राजधानी नगराम थाना क्षेत्र में करीब 15 साल पुराने एक हत्या के प्रयास के मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। इस मामले में मुख्य आरोपी मंशाराम को आजीवन कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई है, जबकि चार अन्य आरोपियों आशाराम, रामप्रकाश, मायाराम और मेवालाल को पांच-पांच साल का कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के अंतर्गत की गई, जिसका मकसद गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाना है।

जानिये क्या था पूरा मामला 

यह घटना वर्ष 2009 में नगराम थाना क्षेत्र के ग्राम पटवाखेड़ा मजरा समेसी की है। वादी चंद्रशेखर द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, उनके पिता मक्का पासी खेत की रखवाली कर रहे थे, तभी पुरानी रंजिश के चलते मंशाराम, आशाराम, रामप्रकाश, मायाराम और मेवालाल ने लाठी, डंडों और कुल्हाड़ी से उन पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में मक्का पासी गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने तत्कालीन धारा 147, 148, 149, 302, 307, 323, 504, 506 व 34 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपियों को दोषी साबित किया।

दोषियों को क्या सजा मिली

मामले की सुनवाई लखनऊ की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नंबर-21 में हुई। लगभग 15 साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने मंगलवार को निम्न निर्णय सुनाया। मंशाराम पुत्र रघुनाथ पासी धारा 302 में उम्रकैद और 50,000 जुर्माना। इसके अलावा अन्य धाराओं में अलग-अलग सजाएं भी सुनाई गईं, जो साथ-साथ चलेंगी। आशाराम, रामप्रकाश, मायाराम और मेवालाल (सभी पुत्र रघुनाथ पासी) – धारा 307/34 में 5-5 साल का कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना। अन्य धाराओं में भी सजा दी गई।

पुलिस और अभियोजन की अहम भूमिका

यह फैसला लखनऊ पुलिस और अभियोजन विभाग के समन्वय से लिया गया। पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत इस केस की गंभीरता से पैरवी की गई।इसमें पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी), अपर पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी), सहायक पुलिस आयुक्त मोहनलालगंज और थानाध्यक्ष नगराम ने सक्रिय भूमिका निभाई।वहीं, मुकदमे की लगातार पैरवी हेड कांस्टेबल मनीष तिवारी द्वारा की गई, जिससे दोषियों को सजा दिलाई जा सकी।

अपराधियों को जल्दी सजा दिलाने के लिए चलाया जा रहा ऑपरेशन कन्विक्शन

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उत्तर प्रदेश पुलिस का ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ पुराने गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए चलाया जा रहा अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य न्याय में देरी को समाप्त करना और अपराधियों को सख्त सजा दिलवाना है।लखनऊ पुलिस की इस सफलता को न्याय व्यवस्था में विश्वास बहाल करने वाला कदम माना जा रहा है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि वर्षों पुराने मामलों में भी पुलिस और अभियोजन जब संगठित रूप से काम करें, तो अपराधियों को सजा दिलाना संभव है।

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